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Showing posts from January, 2025

मैं इंतज़ार करूँगा

दुल्हन का गृह प्रवेश,  मेहमानों की विदाई, प्रवास का निमित्त हुआ पूरा  होनी है मेरी अब घर से जुदाई। घर को हसरत भरी नज़र से देखा विरासत में मिली इमारत को देखा, कृतज्ञ हूँ ब्रह्मलीन अम्मा बाबू की वजह दी है जड़ों से जुड़े रहने की। खेत खलिहान ये हवेली सब कुछ तो छोड़ गए, बागडोर का एक सिरा मेरे जिम्मे भी कर गए। गाड़ी का हॉर्न बजा बाहर थोड़ा सा कुछ टूटा मेरे अंदर, बड़ों के चरण स्पर्श कर छोटों को गले लगाया। पर्स कंधे पर लटकाकर भारी मन से कदम बढ़ाया, औपचारिकता निभाने कोई कोई साथ बाहर आया। कदम निकाला दहलीज़ से पलटकर एक नज़र घर को देखा अकस्मात रुँधी पुकार आई आती रहना,इंतज़ार करूँगा। तुम सबसे ही मेरी रौनक है तुम्हारे बिना मेरा कौन है। मालिक ने पाई पाई जोड़ अरमानों से मुझे बनाया था। बच्चों के सिर पर छत हो आँखों में सपना सजाया था। सबसे सुंदर भव्य बने घर कलकत्ते से राजगीर आया था। मेरी गोदी में खेलकूद बड़े हुए चंचल बच्चे,आज बूढ़े हो चले, जरा सोचो! मैं कितना बूढ़ा हूँ पता नहीं कब तक खड़ा हूँ। धूलधूसरित,तालों में जकड़ा महीनों अँधेरे में डूबा रहता , आँधी तूफान सहता हूँ खानाबदोश मैं रहता हूँ। सुन रही हो न!मेरी करा...

बरस बीते तमाम

बरस बीते तमाम  घर आज फिर आना हुआ, घर की दहलीज़ पर  एक पल ठिठक से गए कदम धुँधला सा नज़र आया अम्मा का लोटे में पानी लेकर आना हर बार दौड़ी चली आती थीं मेरे ही अश्कों ने रस्म निभाई कुछ बूँदें कदमों तक लुढ़क आईं। सीढ़ियों से चढ़ते,दहलीज़ लाँघ अंदर चलती चली गई, एक हाथ से पकड़े पल्लू दूसरे हाथ में सूटकेस । ओसार से गुजरते हुए हवा की सरसराहट कानों में कहती महसूस हुई अम्मा बाबू का आशीष लाई हूँ आओ संस्कारी बहू हो ना! जब्त जज़्बातों से रिश्ते निभाओ। वही घर, वही छत,वही आँगन पसरा था हर तरफ बेगानापन सबके पास जाकर मिली पर अम्मा वाली अहक न मिली। तसल्ली देती रही खुद को मुस्कराहट का आवरण ओढ़ लिया, विवाहोत्सव में सब मग्न  रस्मों के प्रति मेरा अंतर्द्वंद, रह रहकर उठती थी टीस छिपाती रही अपना दर्द, भावनाओं का सैलाब समेटा रिश्तों का रूखापन छोड़ा, आँचल में बाँधी पुरानी यादें ली तस्वीरें कुछ जिंदा यादों की, एक बार फिर निकली घर से अपनों के बीच बेगानी सी। मुझे ब्याहकर लाने वाले दुनिया से रुखसत हो चले थे, खून और पानी के रिश्ते वक़्त के दरिया में  कब का बह चुके थे।। -----पूनम त्रिपाठी      01/...