हम सोचते बहुत हैं
हम सोचते बहुत हैं लेकिन करते कुछ नहीं।। क्योंकि हम डरते हैं अगर साथ सच्चे का दिया तो लोग अकेला कर देंगे साथ मेरा वो छोड़ देंगे।। हम सोचते बहुत हैं लेकिन करते कुछ नहीं।। हम देखते हैं अन्याय होते हुए लेकिन चुप रहते हैं, क्योंकि मन से हम कायर हैं स्वार्थ अपना देखते हैं।। हम सोचते बहुत हैं लेकिन करते कुछ नहीं।। दिल दिमाग पर पड़ी धूल साफ करते नही आलोचना अच्छी कर लेते हैं आवाज़ अंतरात्मा की सुनते नहीं।। हम सोचते बहुत हैं लेकिन करते कुछ नहीं।। हो सके तो सहारा बनो एक बार सुकून दिल को मिलेगा सौ बार दर्द बाँटने से तुमको सुख मिलेगा काम यह इतना भी मुश्किल नही।। हम सोचते बहुत हैं लेकिन करते कुछ नहीं।। --------पूनम त्रिपाठी 23/07/2021 🙌💐🙏🙏💐🙌