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एकांत

एकांत के पल अनमोल कोलाहल से दूर मिलता है सुकून  शांत चित्त,बेख्याल मन थकान को परे रख राहत पाता तन कुछ पल यूँ ही खुद के संग जीते, मशीनी जिंदगी में अहमियत है इसकी। वक़्त सरकता है आगे प्राथमिकताएं बदलती  एकांत में चलचित्र सी स्मृतियाँ उद्वेलित होतीं आँखों से होकर गुजरती  भावों की उठती गिरती लहर दिल में हूक सी उठती कभी, कभी खुद को दिलासा देना जीवन में एकांत का यह एक पक्ष निराला। शुष्क जीवन हो चला  न जुल्फों का बिखरना न रुख़सारों पे लाली चिरसुप्त तमन्नाएं  हालातों का गटकते हाला ये होता, तो वो होता ऐसा होता, तो क्या होता ये सारे मन के वहम हैं ज्ञान चक्षु सुदीप्त होते निष्प्रयोज्य भई काया  एकांत रस में डूबते इंतजार अवसान का।। ~~~~Poonam Tripathi            17/06/2022