Posts

Showing posts from March, 2021

मेरा मन कागज़ की नाव..

आजकल अनिश्चितता का दौर है,जिंदगी की गाड़ी चल रही है। हम सब के साथ ऐसा होता है कि मन में कुछ पुरानी यादें, कुछ नए सपने हलचल करते ही हैं। 😊😊🌹🌹🎊🎊 .नित सपनों के बादल में ख्वाबों को तैराता मन कभी हंसाता कभी रुलाता और कभी बच्चा बन जाता कभी तितलियों से रंग भरकर घर आंगन में उड़ता फिरता देख बदलती दुनिया का रंग कभी कभी गुमसुम हो जाता कभी बेसब्र तूफानों सा कभी शीतल मंद हवाओं सा सांझ ढले डूबा रजनी में मन कागज की नाव सा।।      ~~~~पूनम त्रिपाठी                  स्वरचित