फ़िज़ाओं की बात
बात फ़िज़ाओं की क्या करूँ रौनक खुद ही बयां करती है पहलू में जा बैठो कभी इनके हर दर्द की दवा यहाँ मिलती है आग बरसाता है सूरज ज्यों ज्यों अमलतास के झूमर सज़ा लेती है किसी मौसम से हार कहाँ मानती है भयंकर तूफानों से भी लड़ लेती है मूक संदेशे, इशारे समझो इनके अपनी उम्मीदों के संभालो मनके वक़्त करवट बदलेगा जिस दिन मुस्कराकर खिल उठोगे उस दिन बंद पलकों से महसूस करो खुशबू बहारों की सुकूँ देती है सहेजो,प्यार फ़िज़ाओं से करो ज़मी पर जन्नत सा सुख देती है।। ~~~Poonam Tripathi 12/05/2022