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Showing posts from April, 2023

जमाना डिजिटल बा (देसी)

भाय ज़माना डिजिटल बा।। आपन आपन फोनवा पकड़े आपन आपन डेटा लइके, कोने अतरे सब बईठा बा। भाय ज़माना डिजिटल बा।। पढ़ाई लिखाई अउर खेलकूद बिसरेन लड़िका भएन उलूक फोनवई क मारा मार बा। भाय ज़माना डिजिटल बा।। किताबे पर मोबाइल धइके अंगुरी अंउठा खूब नचावइ मूठी मा पकड़े संसार बा। भाय ज़माना डिजिटल बा।। रील बनावइ के कुछौ करिहै खेते सेंवारे में गैयउ चरिहै दुआरे क गईया नरियात बा। भाय ज़माना डिजिटल बा।। घरे दुआरे क चिंता नाही खाय बनावइ के होश नाही फोनई में जिंदगी जात बा। भाय ज़माना डिजिटल बा।। मोह्ह चिंगोरि के फोटो लेइहैं सेल्फी लइके सगरौ भेजिहै फोनवा मा फिल्टर तमाम बा। भाय ज़माना डिजिटल बा।। उठतई मान मेकअप करिहै रहि रहि दिनभर शीशा देखिहै जइसे देखुहार आवत बा। भाय ज़माना डिजिटल बा।। बब्बा रतिया दिनवा खीझै फ़ोन देखि के चभुरी मीझै गारी क ओनके बयार बा। भाय ज़माना डिजिटल बा।। घरे घरे अब इहइ कहानी पइसा बहावई जैसे पानी देखा देखी में सब लुटात बा। भाय ज़माना डिजिटल बा।। फोनवा के धइ देतअ ओहरिया देखा न ओके दिन दुपहरिया समय के बरबादी होत बा। भाय ज़माना डिजिटल बा।। यारी दोस्ती या रिश्तेदारी फोनवई में सारी दुनियादारी कुल रिश्ता इहइ न...

जमाना डिजिटल है

आज ज़माना डिजिटल है ज़माने के साथ चला करो।। सबकी अपनी स्क्रीन  अपना अपना डेटा, उंगलियों में अपनी संसार को समेटा, मेमोरी भरते ही सहेजा हुआ डिलीटा। रिश्ते भी हैं डेटा जैसे डिलीट करते रहते है , जब तक जिससे मतलब  उससे रिश्ता निभाते हैं, पद और ओहदा देख दोस्ती का दम भरते हैं। तरह तरह के एप आ गए घर बैठे सब काम करो, तरह तरह के दोस्त बनाओ गाना दुएड रिकॉर्ड करो, आभासी इस दुनिया में जैसी चाहे मौज करो। रुपया पैसा का लेन देन या समान हो मंगवाना, घर बैठे आ जाता समान बाजार क्यों फिर जाना, परिचित कोई दिखता नही अब बंद हो गया मुसकाना। बैठे बैठे दिन भर चुगते है लैपटॉप पर आँखे खोते, मोबाइल की गिरफ्त में क्या बच्चे और क्या बूढ़े, शनैःशनैः सेहत सब खोते अस्पताल के चक्कर लगते। तालमेल वक़्त से रखो सेहत को मत अपनी खोओ, योगा और व्यायाम करो स्वस्थ अपना खानपान करो, मोबाइल में मिल जाएगा उपाय कोई मनचाहा करो। आज ज़माना डिजिटल है ज़माने के साथ चला करो।। -----PoonamTripathi      17/04/2023

तिलिस्मी दुनिया

तिलिस्मी है ये दुनिया चकाचौंध है हर तरफ, कौन कुंदन,कौन कोयला परदा भरम का आँखों पर। निर्दोष अहिल्या हुई शापित बनी पत्थर, मिली ठोकर, देवराज का मायाजाल था ठुकराई गयी कलंकित कर। मारीच आया स्वर्ण मृग बन छली कपटी वो दानव था, रावण ने भिक्षुक रूप धर सीता माता को छला था। जैसे हर चमकती चीज़ हीरा नहीं हुआ करती, वैसे ही परदे की बातें सच नही हुआ करती। न झुकाना सिर अपना न जमीर कभी गिरने देना, अपनेपन का चोला ओढ़े मक्कारों से बचकर रहना। पूजना है किस पत्थर को किसको ठोकर पे रखना है, हर पत्थर पूजा नही जाता पहले उसको परखना है।। -----Poonam Tripathi       12/04/2023