तिलिस्मी दुनिया
तिलिस्मी है ये दुनिया
चकाचौंध है हर तरफ,
कौन कुंदन,कौन कोयला
परदा भरम का आँखों पर।
निर्दोष अहिल्या हुई शापित
बनी पत्थर, मिली ठोकर,
देवराज का मायाजाल था
ठुकराई गयी कलंकित कर।
मारीच आया स्वर्ण मृग बन
छली कपटी वो दानव था,
रावण ने भिक्षुक रूप धर
सीता माता को छला था।
जैसे हर चमकती चीज़
हीरा नहीं हुआ करती,
वैसे ही परदे की बातें
सच नही हुआ करती।
न झुकाना सिर अपना
न जमीर कभी गिरने देना,
अपनेपन का चोला ओढ़े
मक्कारों से बचकर रहना।
पूजना है किस पत्थर को
किसको ठोकर पे रखना है,
हर पत्थर पूजा नही जाता
पहले उसको परखना है।।
-----Poonam Tripathi
12/04/2023
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