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Showing posts from August, 2022

मन की व्यथा

मन करता है कहूँ बहुत कुछ पर किससे,कौन सुनेगा मुझको सुन भी लेगा तो भी क्या समझेगा कोई मुझको। नज़रिए है सबके अपने अभाव, तजुर्बे और सोच का साझीदार न कोई यहाँ दर्द का व्यापार हो रहा यहाँ दर्द का। उम्मीद ही क्यों रखना खुद को ही है समझना हालातों से लड़ना हो या खुशियों को सहेजना। मन में गोये रखा है कब से जज़्बातों,वेदना की धार को जुबान तक आये शब्द कई बार मगर खामोशी में ज़ब्त हो गए। आत्मा की आवाज़ को सुन अवलोकित मन को रखा है अपने अंतः में जीवन प्रकाश अक्षुण्ण आलोकित रखा है। जिजीविषा है जीने की प्रभु की मर्यादा रखने की कर लिया है दृढ़ मन को स्वीकारना है जीवन को।। ~~~~Poonam Tripathi            10/08/2022

लो आया 15 अगस्त

लो आया पावन 15 अगस्त गोरों को जब दी थी शिकस्त मातृभूमि के थे वो सरपरस्त अंग्रेजों के हौसले किये पस्त। आज़ादी के मतवालों ने इस माटी के रखवालों ने गोरों के काले शासन से भारत माता को किया मुक्त। सोने की चिड़िया देश मेरा दुनिया में जाना जाता था अंग्रेजों ने निर्मम फरेब से दो सौ साल तक लूटा था। गुलामी की जंजीरों की जकड़न सीने में गड़ती थी भारतमाता की कराह वीरों को विचलित करती थी। असह्य हुआ जब अत्याचार वीरों ने मिलकर किया विचार बहुत हुआ अब लड़ना है आज़ादी ही अब सपना है। मंगल पांडे ने क्रांति का बिगुल बजाया मेरठ में चिंगारी भड़की, पहुँची देश के कोने-कोने में। क्या हिन्दू ,क्या मुसलमान क्या बच्चे,बूढ़े और जवान कफ़न बाँध घर से निकले बेख़ौफ़ वीर मतवाले निकले। आंदोलनों का चला दौर आज़ादी बिन न लेंगे ठौर करो-मरो,स्वदेशी पहनों अंग्रेजों अब भारत छोड़ो। भगतसिंह आज़ाद तिलक माटी का करके माथ तिलक आहुति यज्ञ में दे डाली जंजीर गुलामी की तोड़ी। कूटनीति और अत्याचार अंग्रेजों के थे हथियार हिंदू-मुस्लिम को लड़वाया खून खराबा करवाया। अंग्रेजों की बोई नफरत से विभाजन की नींव पड़ी संतानों का देख पलायन माँ भारती सिसक पड़ी। नाम अनाम ब...