लो आया 15 अगस्त
लो आया पावन 15 अगस्त
गोरों को जब दी थी शिकस्त
मातृभूमि के थे वो सरपरस्त
अंग्रेजों के हौसले किये पस्त।
आज़ादी के मतवालों ने
इस माटी के रखवालों ने
गोरों के काले शासन से
भारत माता को किया मुक्त।
सोने की चिड़िया देश मेरा
दुनिया में जाना जाता था
अंग्रेजों ने निर्मम फरेब से
दो सौ साल तक लूटा था।
गुलामी की जंजीरों की
जकड़न सीने में गड़ती थी
भारतमाता की कराह
वीरों को विचलित करती थी।
असह्य हुआ जब अत्याचार
वीरों ने मिलकर किया विचार
बहुत हुआ अब लड़ना है
आज़ादी ही अब सपना है।
मंगल पांडे ने क्रांति का
बिगुल बजाया मेरठ में
चिंगारी भड़की, पहुँची
देश के कोने-कोने में।
क्या हिन्दू ,क्या मुसलमान
क्या बच्चे,बूढ़े और जवान
कफ़न बाँध घर से निकले
बेख़ौफ़ वीर मतवाले निकले।
आंदोलनों का चला दौर
आज़ादी बिन न लेंगे ठौर
करो-मरो,स्वदेशी पहनों
अंग्रेजों अब भारत छोड़ो।
भगतसिंह आज़ाद तिलक
माटी का करके माथ तिलक
आहुति यज्ञ में दे डाली
जंजीर गुलामी की तोड़ी।
कूटनीति और अत्याचार
अंग्रेजों के थे हथियार
हिंदू-मुस्लिम को लड़वाया
खून खराबा करवाया।
अंग्रेजों की बोई नफरत से
विभाजन की नींव पड़ी
संतानों का देख पलायन
माँ भारती सिसक पड़ी।
नाम अनाम बलिदानों से
पावन धरती लाल हुई
15 अगस्त 1947 को
आज़ादी की भोर हुई।
आज़ाद मुल्क,आज़ाद फ़िज़ा
खुशियों का पारावार न था
तिरंगा चढ़कर लालकिले
लहराता इतराता था।।
उसी तिरंगे की खातिर
जन जन को मरना जीना है
विरासत मिली आज़ादी की
रक्षा तन मन धन से करना है।
~~~Poonam Tripathi
05/08/2022
पंतनगर
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