Posts

Showing posts from August, 2021

बचपन का किस्सा

भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का त्यौहार रक्षाबंधन के आते ही बहुत सी स्मृतियाँ     मन मस्तिष्क के गलियारे से गुजरने लगती है। उम्र बढ़ने के साथ बचपन कहीं खोता छूटता जाता है और हम अपने अपने परिवार और उनके प्रति अपने दायित्वों के निर्वहन में व्यस्त हो जाते हैं।रिश्तों का स्वरूप भी परिवर्तित होकर अपनी उस मिठास को कायम नही रख पाता।यादों के वातायन से बहुत से किस्से हमारे समक्ष जीवंत हो जाते है। ये उन दिनों की बात है हम बहुत छोटे थे और जब बड़े भाई की समझदारी से जान बची। मेरे पापा उत्तर प्रदेश सरकार के गन्ना विभाग में अधिकारी थे। किसानों और गन्ना समितियों से संबंधित कार्य के लिए उनको अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा करना पड़ता था। जब कभी पेराई-सत्र के दौरान किसी कारणवश चीनी मिल में गन्ना उपलब्ध नही होता था, तब आपात स्थिति में सरकारी गन्ना खरीद केंद्रों पर रात में भी जाना होता था।  हमारा परिवार छोटे से कार्यालय परिसर में बने सरकारी आवास में रहता था।मेरे दो भाई और मैं स्वयं, तीनों छोटे बच्चे थे।मेरी उम्र लगभग 4 साल,बड़े भाई की 7 साल और छोटे भाई की 2 साल की रही होगी। एक बार किसानों की गन...