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भीड़ में इंसान नही हैं

भीड़ बहुत है दुनिया में, इंसानों का टोटा है, मुश्किल घड़ी में देखा,सबका दिल छोटा है। आज़माओ उनको,जो खुद को खुदा समझते हैं थाह मिल जाएगी,उनका कद कितना छोटा है। जीवन मे कठिनाइयों से जो संघर्षरत रहता है बिना खुशामत के वही, हाथ अपना बढ़ाता है।  प्रारब्ध भोग से धरती पर, कोई भी न छूटा है,  ऊपरवाले तुमपर मेरा,विश्वास कभी न टूटा है।          ----- पूनम त्रिपाठी                    26/11/2022

सुख चैन

थका थका आया था घर सोफे में जा धँस गया खिड़की के उस पार बोझिल नज़रों से देखा बादलों के आवरण से आसमान सारा ढका था बाहर की चकाचौंध से                         आँखों को सुकून मिला खिडकी से आती मंद पवन रोम रोम सहलाती गयी सुखद शीतल स्पर्श से मुझको दुलराती गयी पेडों के नर्तन करते पत्ते मोहपाश में बाँधते गए अनजानी सी डोर से अपनी ओर मुझको ले गए खुद को भुला बैठा था मैं थकान काफूर हो गयी प्रकृति माँ न जाने कब नींद के आगोश में ले गयी।। ~~~~Poonam Tripathi           04/11/2022           बैंगलोर