जमाना डिजिटल है

आज ज़माना डिजिटल है
ज़माने के साथ चला करो।।

सबकी अपनी स्क्रीन 
अपना अपना डेटा,
उंगलियों में अपनी
संसार को समेटा,
मेमोरी भरते ही
सहेजा हुआ डिलीटा।

रिश्ते भी हैं डेटा जैसे
डिलीट करते रहते है ,
जब तक जिससे मतलब 
उससे रिश्ता निभाते हैं,
पद और ओहदा देख
दोस्ती का दम भरते हैं।

तरह तरह के एप आ गए
घर बैठे सब काम करो,
तरह तरह के दोस्त बनाओ
गाना दुएड रिकॉर्ड करो,
आभासी इस दुनिया में
जैसी चाहे मौज करो।

रुपया पैसा का लेन देन
या समान हो मंगवाना,
घर बैठे आ जाता समान
बाजार क्यों फिर जाना,
परिचित कोई दिखता नही
अब बंद हो गया मुसकाना।

बैठे बैठे दिन भर चुगते है
लैपटॉप पर आँखे खोते,
मोबाइल की गिरफ्त में
क्या बच्चे और क्या बूढ़े,
शनैःशनैः सेहत सब खोते
अस्पताल के चक्कर लगते।

तालमेल वक़्त से रखो
सेहत को मत अपनी खोओ,
योगा और व्यायाम करो
स्वस्थ अपना खानपान करो,
मोबाइल में मिल जाएगा
उपाय कोई मनचाहा करो।

आज ज़माना डिजिटल है
ज़माने के साथ चला करो।।

-----PoonamTripathi
     17/04/2023





Comments

Popular posts from this blog

इंसानियत (कविता)

तिलिस्मी दुनिया

मेरा मन कागज़ की नाव..