राजनीति के खेल

राजनीति के देखो खेल
मँजे खिलाड़ी खेलें खेल
प्यादे जगह जगह बैठाए
मौके की वो आस लगाए
सबको चाहत गद्दी की
परवाह नहीं है गड्डी की
महँगी गाड़ी, महँगे बँगले
काम पड़े तो झाँके बगले
बात बात पर इज़्ज़त जाती
जनता फिर कुटवाई जाती
संसद हो या नुक्कड़ चौक
धक्का-मुक्की, गाली-गलौज
जाति-धर्म के पासे फेंकें
कफ़न के ऊपर रोटी सेंकें
दाँव पेंच के माहिर बंदे
गज़ब हैं इनके हथकंडे
स्वारथ में कुछ भी करवा लो
सड़कों पर झाड़ू लगवा लो
मुद्दे की ये बात न करते
संसद का सम्मान न करते
बेमतलब हंगामा करते
सदन में कुर्सी मेज तोड़ते
जनता का विश्वास बेंचते
दुहाई लोकतंत्र की देते
सफेद रंग का जामा पहने
गिरगिट जैसे रंग बदलते
सत्ता की बिसात पर बिछते
जब-तब माई-बाप बदलते।।

~~Poonam Tripathi
     28/06/2022     






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