साहब आने वाले है

चार धाम की यात्रा कर
हम आज ही वापस आये हैं,
आनन फानन दफ्तर भागे
सुना है साहब आने वाले हैं।

गहमागहमी मची हुई है 
व्यवस्था लगभग पूरी है
दफ्तर सारा चकाचक है
साहब के आने की देरी है।

इंचारज जी बेचैनी में
मातहतों को डाँट रहे,
रत्ती भर गड़बड़ न हो
तुम सबको यह ध्यान रहे ।

दफ्तर आज खुला समय से 
छोटे सर जी भी जल्दी आए  
साहब के बैठने के खातिर
आराम कुर्सी भी संग लाए।

बिजली बत्ती,एसी, पंखा
बार बार चेक करते हैं,
बिजली अगर चली गयी तो
हाथ का पंखा झलते है।

चाय पकौड़े और समोसे
ऑर्डर पर बन कर आये हैं,
साहब की सेहत न बिगड़े
बोतल का पानी लाये है।

पल पल की खबर ले रहे 
सर जी बेचैन हुए जाते हैं,
इतना वक़्त क्यों लगा रहे,
मन ही मन खीझे जाते हैं।

फ़ोन बजा छोटे सर जी का
"साहब का पी ए बोल रहा हूँ,
आज का दौरा रद्द हो गया
मंत्रीजी का स्वागत कर रहा हूँ।"

फेल हो गया सूचना तंत्र
तनिक भनक न लग पाई
औचक हुए आगमन से
साहब जी की शामत आई।

दफ्तर में लग रहे ठहाके
सब चाय पकौड़े खाते है
आराम कुर्सी पर सुस्ताते
छोटे सर जी मुस्काते हैं।

-----Poonam Tripathi
      19/04/2023







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