बसंत एक आशा
ऋतु-परिवर्तन प्रकृति का नियम है।सूर्य के उत्तरायण आते ही धरती का तापमान बढ़ना शुरू हो गया,जाड़े की ठिठुरन से निजात मिलने लगी है।बरखा रानी लगभग हर पखवाड़े इठलाते झूमते आ जाती है और तेजी से ग्रीष्म ऋतु की ओर भागती मौसम की रफ्तार को अवरुद्ध कर मौसम सुहाना बना जाती है।बसंत ऋतु है चारों ओर हरियाली और फुलवारी की छटा निराली देखते ही बनती है।जाड़े में शाम होते ही लोग घर मे दुबक जाते थे परंतु अब देर शाम तक बाज़ार और सड़कों पर रौनक रहती है।धरा पर नवजीवन का संचरण है।प्रस्तुत है गतवर्ष स्वरचित लघु रचना----
*बसंत ऋतु*
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मुश्किल जीवन, राह अंधेरी,
छाई घोर निराशा गहरी
कुछ पल को ली साँसे गहरी,
अविलंब जगी चेतना मेरी।
पतझड़ का मौसम बीत चुका,
मिला उम्मीदों को मौका
नज़र घुमा देखा हर ओर,
फूलों से सजी धरा चहुँओर
पैगाम मिला नवजीवन का,
खिल उठा चमन मेरे मन का
झरते रहते है खिले सुमन,
फिर भी क्या मरता उपवन
जीवन की यात्रा है अनंत,
मैंने तुमको चुना प्रिय बसंत।।
~Poonam Tripathi
21जनवरी2021
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